गोपालगंज में माँझा के लंगटूहाता में भूमि विवाद को ले पत्रकार पर फायरिग

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मांझागढ़ थाना क्षेत्र के लंगटूहाता गांव में बुधवार को दो पट्टीदारों के बीच चल रहे भूमि विवाद को लेकर कुछ लोगों ने घर के बाहर खड़े पत्रकार पर चार राउंड फायरिग कर दी। फायरिग शुरू होते की पत्रकार ने घर में घुस कर अपनी जान बचाते हुए सूचना पुलिस को दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ थानाध्यक्ष विशाल आनंद मौके पर पहुंच गए। मौके से एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटनास्थल से पुलिस ने दो खोखे बरामद किए गए हैं। पुलिस अन्य आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी अभियान चला रही है।

बताया जाता है कि लंगटूहाता गांव निवासी अजय पांडेय तथा बजरंग पांडेय के बीच जमीन संबंधित विवाद चल रहा है। दोनों पट्टीदार हैं। बुधवार की दोपहर कुछ लोग विवादित जमीन पर पहुंच कर पिस्तौल लहराते हुए फायरिग करने लगे। इसी दौरान फायरिग कर रहे लोगों की नजर अपने घर के दरवाजे के पास खड़े एक दैनिक अखबार (दैनिक जागरण नहीं) के पत्रकार राजन पाडेय पर पड़ी। इसके बाद इन पर फायरिग कर दिया गया। हालांकि फायरिग शुरू होते ही पत्रकार ने घर में घुस कर अपनी जान बचा ली। इसी बीच पत्रकार से सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष विशाल आनंद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने घटनास्थल से दो खोखा बरामद करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किया गया आरोपित अजय पांडेय का पुत्र गोविद पांडेय बताया जाता है। थानाध्यक्ष विशाल आनंद ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपित के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, यह कई बार जेल जा चुका है। जल्द की हथियार बरामद करते हुए अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं पत्रकार राजन पांडेय ने बताया कि उनका किसी के साथ कोई भूमि विवाद नही है। भूमि विवाद दो पट्टीदारों के बीच है। इसके बाद भी बार बार मुझे जान से मारने की कोशिश की जा रही है।

नौ महीने पूर्व अपराधियों ने पत्रकार को मारी थी गोली:

लंगटूहाता गांव में बुधवार को जमीन संबंधित विवाद में की गई फायरिग में पत्रकार राजन पाण्डेय बाल बाल बच गए। लेकिन इनके ऊपर फायरिग की यह पहली घटना नहीं है। नौ महीने पूर्व अपराधियों ने पत्रकार राजन पाण्डेय को गोली मार कर घायल कर दिया था। 29 सितंबर 2020 की सुबह लंगटूहाता गांव निवासी पत्रकार राजन पाण्डेय बाइक से मांझा बाजार जा रहे थे। इसी बीच पुरानी बाजार मोड़ के पास अपराधियों ने ओवरटेक कर इन्हें रोककर गोली मार दी थी। गोली लगने से घायल पत्रकार का गोरखपुर में काफी दिनों तक इलाज चला था। इस घटना के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष छोटन कुमार ने दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस घटना के नौ महीने बाद एक बार फिर पत्रकार राजन पाडेय को जान से मारने की कोशिश की गई।

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