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यूक्रेन में फंसे मीरगंज के मेडिकल छात्रों का दल रोमानिया बॉर्डर पहुंचा

मीरगंज शहर के नरइनिया और सवरेजी गांव के तीन मेडिकल छात्र 16 घंटे से ज्यादा समय से रोमानिया बॉर्डर के पास फंसे हुए हैं। बॉर्डर पर लगी लंबी लाइन में भारी भीड़ होने के कारण अब तक उन्हें रोमानिया में प्रवेश नहीं मिल सका है। हालात यह है कि अब उनके पास का खाना और पानी भी धीरे-धीरे समाप्ति के कगार पर हैं पर अभी तक उनका वहां के दूतावास के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका है।

यूक्रेन के विन्नित्सा में पढ़ रहे तीनों मेडिकल छात्रों के नाम नवनीत कौशिक, उत्कर्ष मिश्रा और अमित कुमार है, जो रूस के आक्रमण के बाद से ही विन्नित्सा यूनिवर्सिटी में फंसे हुए हैं। हालांकि कई दिनों के उहापोह के बाद आखिर उनके यूनिवर्सिटीज में बसों की व्यवस्था की और उन्हें रोमानिया बॉर्डर के पास छोड़ दिया। इसके बाद विद्यार्थी पैदल चलते हुए किसी तरह से रोमानिया के बॉर्डर पर रात के 3 बजे ही पहुंच गए। इसके बाद तब से वहां पर भूखे प्यासे रोमानिया बॉर्डर में प्रवेश करने के बारी का अपना इंतजार कर रहे हैं।

सरकार से फ्लाइटों की संख्या बढ़ाने की मांग:

इधर अपने बच्चों की हालत को लेकर अभिभावक दिन-रात उन्हीं के सोच में डूबे हुए हैं पर अब मुश्किल यह भी आ गई है कि बॉर्डर पर फंसे छात्रों के मोबाइल भी कम चार्ज हो पा रहे हैं, जिस कारण उनका संवाद भी अभिभावकों से कम हो पा रहा है। अमित कुमार के पिता लाल बहादुर सिंह ने कहा कि निकलने में जितनी देरी हो रही है उतना ही बच्चों की परेशानी बढ़ती जा रही है और उनकी परेशानी देखकर हमारा दिल बैठता जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि फ्लाइटों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे बच्चों को वहां से सुरक्षित वापसी हो सके।

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