Mukesh Kumar: मुकेश के बुलंद हौसलों के आगे हारी गरीबी; पिता चलाते थे ऑटो, बेटा IPL से बना करोड़पति

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जिले के सदर प्रखंड के काकड़पुर गांव निवासी क्रिकेटर मुकेश कुमार ने अपने टैलेंट के बल पर खेल जगत में खूब नाम कमाया है। गांव की गलियों से क्रिकेट खेलकर पश्चिम बंगाल के लिए रणजी ट्राफी खेलने वाले मुकेश अब भारतीय टीम में जगह बना चुके हैं।

बीते दिनों उन्हें दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने आईपीएल के लिए 5.50 करोड़ की बोली लगाकर खरीदा था। गरीब परिवार से आने वाले मुकेश के लगातार मुकाम हासिल करने से उनके स्वजन के साथ जिले के क्रिकेट प्रेमी भी काफी खुश हैं। काकड़पुर गांव निवासी काशीनाथ सिंह व मालती देवी के पुत्र मुकेश कुमार छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।

सड़क हादसे में आंख के नीचे लगी थी चोट

मुकेश ने गांव की गलियों में क्रिकेट खेलने की शुरूआत की। इस दौरान उनकी बेहतर गेंदबाजी को देखकर उन्हें जिलास्तरीय टीम के तत्कालीन कप्तान अमित सिंह ने जिला टीम में खेलने के लिए बुला लिया। जिला टीम में बेहतर प्रदर्शन कर ही रहे थे। इसी बीच शहर के अरार मोड़ पर सड़क हादसे में उनकी आंखों के नीचे चोट आ गई। इसके बाद उनके पिता काशीनाथ सिंह उन्हें पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर लेकर चले गए और वहीं ऑटो चलाकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करने लगे।

पिता का बीमारी से हुआ निधन

परिवार के भरण पोषण के साथ पिता ने मुकेश की क्रिकेट प्रति लगाव को देखते हुए उन्हें क्रिकेट एकेडमी में दाखिल करा दिया। पिता के प्रयास के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल से रणजी मैच खेलकर अपनी छाप छोड़ दी। इसी दौरान उनके पिता का बीमारी से निधन हो गया। गरीब परिवार से आने के बाद भी मुकेश ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने भारतीय टीम ए में जगह बनाई। न्यूजीलैंड टीम ए के विरुद्ध मैच में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई।

गरीब होना कोई बुराई नहीं, संघर्ष से आसान होता है जीवन

मुकेश बताते हैं कि कभी दो वक्त की रोटी के लिए उनके पिता-चाचा कोलकाता जैसे शहर में ऑटो चलाते थे, ताकि उनके बच्चे अपना सपने पूरा कर सकें। मुकेश कुमार ने बताया कि आज के समय में युवाओं को सबसे पहले जीवन में क्या करना है। अपने करियर में क्या बेहतर और कैसे हो, इसके लिए एक लक्ष्य बनाएं। लक्ष्य बनाने के बाद उसपर बेहतर काम करें। चाहे जीवन में बड़ी से बड़ी समस्या आए, घबराना नहीं है। घर के सदस्यों के साथ रहकर अपने जीवन में तय किए गए लक्ष्य के लिए कार्य करें। गरीबी कोई बुराई नहीं है। संघर्ष से ही जीवन आसान होता है।

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