भाजपा विधायक बोले- हुजूर मैं बीमार हूं, माफ कर दीजिए, एमएलए को कोर्ट ने सुनाई ये सजा

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बिहार के पूर्व मंत्री सह वर्तमान बरौली के भाजपा विधायक रामप्रवेश राय को अदालत ने एक मामले में दोषी पाते हुए 1000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं करने पर छह माह कारावास होगा। यह कार्रवाई विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में की है। सजा सुनाने से पूर्व विधायक को न्यायिक अभिरक्षा में लिया गया था। वहीं सजा सुनाए जाने के बाद अर्थदंड की राशि जमा विधायक ने जमा कर दी। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह जानकारी गोपालगंज अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी ओमप्रकाश सिन्हा ने दी।

हुजूर मैं बीमारी से ग्रसित हूं

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपित पूर्व मंत्री सह विधायक रामप्रवेश राय ने कहा कि हुजूर यह मेरा प्रथम अपराध है। मैं एक वरिष्ठ वृद्ध नागरिक हूं। कुछ गंभीर बीमारी से ग्रसित हूं। मेरा इलाज राजधानी पटना के अस्पताल में नियमित रूप से समय-समय पर किया जा रहा है। भविष्य में इस तरह के किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होऊंगा। सदैव विधि द्वारा स्थापित कानून का पालन करूंगा। साथी एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा।अतः मेरे इस प्रथम अपराध पर सहानुभूतिपूर्वक व दयापूर्वक विचार करते हुए मुझे माफ कर दिया जाए। अभियोजन पदाधिकारी ने कहा कि यह सही है कि आरोपित रामप्रवेश राय का यह प्रथम अपराध है। उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री के पद पर रहते हुए चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया तथा इनके कृत्य से आम मतदाता प्रभावित हुए। उन्होंने जनसेवक के रूप में अपने कर्तव्य का जानबूझकर उल्लंघन किया है। अतः इन्हें सजा दी जाए। अभियोजन पदाधिकारी के सामने विधायक की दलील नहीं चली।

22 अक्टूबर विधायक ने किया था आत्मसमर्पण

विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने बुधवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 171एफ के तहत दोषी पाते हुए विधायक को सजा सुनाई। बता दें कि विधायक पर इससे पूर्व गैर जमानतीय वारंट जारी किया गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को उनके आत्मसमर्पण के बाद अदालत ने 5000 रुपया जुर्माना लगाते हुए सशर्त जमानत दी थी।विधायक ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में दिव्यांग एवं गरीबों की मदद के मद में दंड की राशि जमा कराई थी।

राजद विधायक ने जज से कहा- यह पहला अपराध है हुजूर, माफ कर दीजिए; अदालत ने सुना ही दी सजा