गोपालगंज में मां और बेटे को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा, अब आएगी इनकी बारी

362

हत्या के एक मामले में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडेय की अदालत ने दोषी मां-बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इससे पहले 15 जनवरी को न्यायालय ने मां व बेटे को दोषी करार दिया दिया था। आपराधिक मामले में 21 जनवरी को सजा के बिंदु पर सुनवाई की बात कही थी। इस मामले में रंजन मांझी और उसकी मां मीना देवी जेल में बंद हैं। अब इस मामले में मुख्‍य आरोपित की बारी है। वह जेल में बंद है।

आपसी विवाद में किए गए हमले में हो गई थी मौत 

जानकारी के अनुसार, बरौली थाना क्षेत्र के के माधोपुर ओपी क्षेत्र के महम्मदपुर जदी गांव में 6 सितंबर 2020 को आपसी विवाद के बाद कुछ लोगों ने राजेंद्र रावत पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था। इसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के क्रम में उनकी मौत हो गई। घटना को लेकर राजेंद्र रावत के बेटे चंदन रावत के बयान पर बरौली थाने में प्राथमिकी (कांड संख्या 243/2020) दर्ज की गई। इसमें इंद्रजीत मांझी, उसकी पत्नी मीना देवी व पुत्र रंजन मांझी को नामजद आरोपित बनाया गया।

मां-बेटे के खिलाफ कोर्ट ने दाखिल किया आरोप पत्र

पुलिस ने इस आपराधिक मामले में रंजन मांझी व उसकी मां मीना देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। एक अन्य आरोपित इंद्रजीत मांझी की तब गिरफ्तारी नहीं होने के कारण पुलिस ने मीना देवी व रंजन मांझी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में सत्र न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्य के आलोक में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडेय की अदालत ने मीना देवी व उसके पुत्र रंजन मांझी को शनिवार को दोषी करार दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई 21 जनवरी को तय थी। आज कोर्ट ने दोनों को सजा सुना दी। जेल में बंद है तीसरा आरोपित

धारदार हथियार से युवक की हत्या करने के मामले में तीसरा आरोपित

इंद्रजीत मांझी जेल में बंद है। तत्कालीन माधोपुर ओपी प्रभारी धनंजय कुमार ने बताया कि घटना के चार माह बाद तीसरे आरोपित इंद्रजीत मांझी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दिया गया है। इंद्रजीत मांझी के विरुद्ध के जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है।

थावे: प्रियांशु हत्याकांड में दो को आजीवन कारावास