उचकागांव: अतिक्रमण में फंसी लाइन बाजार की जल निकासी की व्यवस्था

जिले के उचकागांव, फुलवरिया और हथुआ तीनो प्रखंडों की सीमा पर स्थित लाइन बाजार मे जल निकासी की की व्यवस्था पूरी तरीके से अतिक्रमण की शिकार हो चुकी है। इसका मुख्य कारण है बाजार के नालियों का पानी पहले कभी जिन सरकारी गड्ढों में गिरता था, उन स्थानों पर अब दबंग लोगों ने अपना कब्जा जमा लिया है। इस शहर की नालियों का पानी निकल नहीं पाता है। ऐसे में हल्की बारिश के बाद पूरा इलाका जल जमाव की चपेट में आ जाता है।

वैसे तो लाइन बाजार हथुआ प्रखंड की सीमा में आता है। परंतु उचकागांव और फुलवरिया प्रखंड मुख्यालय से नजदीक होने के कारण लाईन बाजार मे इन दोनों क्षेत्रों के निवासियों का प्रमुख बाजार व व्यावसायिक केंद्र बन गया है। लेकिन यहां के लोगों के लिए जल निकासी की व्यवस्था काफी पीड़ा पहुंचाती है। यहां करीब एक दशक पूर्व तक जल निकासी की समस्या नहीं थी। लेकिन नालों से निकले पानी को जमा करने वाले स्थान पर कुछ लोगों के कब्जा किए जाने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। आज भी इस बाजार के कई प्रमुख इलाकों में कच्ची नालियां ही हैं। जहां पक्के नाले बनाए गए हैं, उस इलाके के नाले कचरे से पटे हुए हैं। ऐसे में लाइन बाजार का इलाका जल जमाव की समस्या झेलने को विवश है। लंबे समय से इस समस्या के समाधान के प्रति कोई भी सटीक प्लान तैयार नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। कचरे की समय से नहीं होती सफाई

हथुआ : लाइन बाजार में नालों से लेकर शहरी इलाके की सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। नालों की तो मानों सफाई की ही नहीं जाती। कुछ इलाकों के नालों को साफ किया भी जाता है तो स्लैब के अभाव में नाले दो-चार दिन में ही दोबारा कचरे से भर जाते हैं। कई इलाकों में तो लोग अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सफाई करने के बाद नाले में ही कचरा गिरा देते हैं। जिसके कारण नालों की दशा और खराब हो जाती है।

लाइन बाजार के इलाके में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जल्द ही अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाएगा। ताकि नालों से निकलने वाले पानी को निश्चित स्थान पर जमा कराया जा सके। इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा है।

अंचल पदाधिकारी, हथुआ

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