सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सदर अस्पताल में दो दिन पहले आंख अस्पताल और पीडियाट्रिक वार्ड का उद्घाटन किया, लेकिन यह अस्पताल उद्घाटन तक ही सीमित रह गया. उद्घाटन के कुछ ही घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अस्पताल में ताला लगा दिया. एक ओर जहां पीडियाट्रिक वार्ड में डॉक्टर नहीं हैं, तो आंख अस्पताल में कर्मियों की कमी है. ऐसे में लाखों रुपये की मंगायी गयी मशीन मरीजों के काम नहीं आ रही हैं.

सदर अस्पताल में आंख की जांच कराने पहुंचे जादोपुर के सुनील यादव, बरौली के रामकुमार साह और कुचायकोट के छोटन साह समेत अन्य मरीजों को लौटना पड़ा. सरेया मुहल्ले से सोनाली देवी अपने पांच साल के बेटे छोटू दिखाने पीडियाट्रिक वार्ड में पहुंची, जहां ताला लगा हुआ था. महिला ने कहा कि अस्पतालकर्मियों ने उद्घाटन के बाद से ही वार्ड बंद होने की बात बतायी. पीडियाट्रिक वार्ड 10 बेडों का है. इस वार्ड में एक माह से लेकर 10 साल तक के बीमार बच्चों को भर्ती लिया जाता है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार की शिकायत को देखते हुए सदर अस्पताल में 10 बेडों का आइसीयू खोला गया है. सदर अस्पताल में जिस अस्पताल का स्वास्थ्य मंत्री ने उद्घाटन किया, वह अधूरा है. आंख अस्पताल में कई उपकरण नहीं हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपकरण और मशीनों को खरीदने की बात कही जा रही है. वहीं पीडियाट्रिक वार्ड में एसी नहीं है. इसके अलावा बच्चों को ऑक्सीजन देने के लिए पाइपलाइन नहीं है. ऐसे में आइसीयू वार्ड में भर्ती कैसे लिया जा सकता है.
क्या कहते हैं सीएस
कुछ मशीनें नहीं हैं, जिन्हें मंगायी जा रही है. डॉक्टर व नर्स की कमी है. सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है. छठ के बाद दोनों वार्डों को चालू कर दिया जायेगा.
डॉ नंदकिशोर सिंह, सिविल सर्जन, गोपालगंज

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