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गोपालगंज : अतिक्रमण की चपेट में आधा शहर, सड़क पर चलना मुश्किल | | Gopalganj समाचार

गोपालगंज : अतिक्रमण की चपेट में आधा शहर, सड़क पर चलना मुश्किल

शहर की सड़कों का जाम में फंसना और उसमें से निकलने के लिए लोगों का एक दूसरे से उलझना अब आम बात हो गई है। शहर की आधी से अधिक सड़कें पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में है। लेकिन प्रशासन इस बड़ी समस्या के प्रति बेपरवाह है। आम लोग हर दिन अतिक्रमण में फंसने को विवश होते हैं। कलेक्ट्रेट पथ हो या पुरानी चौक सड़क, मेन रोड हो या घोष मोड़। शहर की सभी मुख्य सड़कों की दशा एक समान ही है। सड़क किनारे तथा सड़क को पकड़ कर दुकानें लगाए जाने के कारण कलेक्ट्रेट पथ से लेकर पुरानी चौक, सदर अस्पताल पथ से लेकर डाकघर चौक तक दुकानें सज रही हैं। हद तो यह कि दिन प्रतिदिन दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिससे वाहनों की कौन कहे इन सड़कों पर पैदल चलने वालों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।

प्रत्येक दिन लगने वाले जाम से परेशान शहर वासी बताते हैं 2 अक्टूबर 1973 को जब गोपालगंज को जिला का दर्जा मिला था। तब गोपालगंज शहर एनएससी एरिया में आता था। समय के साथ इसे नगर पंचायत तथा बाद में नगर परिषद का दर्जा मिल गया। सड़कें भी चौड़ी हुई। अब बंजारी चौक से लेकर अंबेडकर चौक तथा अंबेडकर चौक से अरार मोड़ तक की सड़क को टू लेन बनाया गया। लेकिन सड़क पर अतिक्रमण नहीं हो, इसके लिए कोई भी प्लान नहीं बना। यहीं कारण है कि वर्तमान समय में जिला मुख्यालय की तमाम सड़कें अतिक्रमण की चपेट में हैं। सड़क पर ही दुकान लगाए जाने के कारण तमाम सड़कें सकरी हो गई हैं। जिला मुख्यालय की हरेक प्रमुख पथ से लेकर संपर्क पथों की दशा एक समान ही है। हालत यह है कि कलेक्ट्रेट पथ पर न्यायालय के ठीक सामने अतिक्रमण सरेआम दिखता है। इस मार्ग से होकर हर दिन जिले के वरीय पदाधिकारियों का आना-जाना होता है। लेकिन अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की अनदेखी अब भी जारी है। जिसका नतीजा हर आम व्यक्ति प्रत्येक दिन भुगत रहा है।

अतिक्रमण हटाने का अभियान दिखावा:

सड़कों पर अतिक्रमण हटाने के दिशा में प्रशासन ने कई बार अभियान चलाया। इसके साथ ही करीब डेढ़ दशक पूर्व फुटपाथी दुकानों को मुख्य सड़क से हटाने के बाद उन्हें सरकारी स्तर पर रियायती दर पर दुकानें भी आवंटित की गई थी। लेकिन अधिकांश दुकानदारों ने पूर्व में आवंटित दुकानों को बेचकर दोबारा पुराने स्थानों पर अपनी दुकानें लगा लिया है। पिछले एक दशक से जो भी अभियान अतिक्रमण हटाने लिए चलाया गया, वह दिखावे का ही साबित हुआ है।

सड़क पर खड़े होते 500 से अधिक ठेले:

गोपालगंज : शहर में अतिक्रमण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रत्येक दिन 500 से अधिक ठेले की दुकानें सड़क पर ही सजती हैं। ठेला शहर की सड़कों के एक सिरे पर लगाया जाता है। लेकिन इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है। हालत यह कि ठेला पर दुकानों की संख्या प्रत्येक दिन बढ़ती ही जा रही है।

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