लगातार बारिश प्रखंड मुख्यालय का गांव भोरे टापू बन गया है। लगातार बारिश ने इस गांव की हालत खस्ता कर दी है। पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। त्योहारी मौसम के कारण लोगों को जरूरी सामान के लिए बाजार और सड़कों तक जाने में काफी मुश्किल और मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

भोरे बाजार सहित गांव टापू में नजर आ रहा है। हर तरफ पानी ही पानी नजर आने से यह कहा मुश्किल हो गया है कि भोरे में पानी भर गया है या पानी में ही भोरे बसा है। गांव और बाजार के सभी मोहल्ले व सड़कें जलमग्न हो गए हैं। शायद ही कोई घर होगा, जिसे के बाशिदों को अपने दरवाजे से निकलने के लिए जलजमाव से होकर नहीं गुजर पड़ रहा है। भोरे का थाना रोड, वायरलेस चौक, बनिया टोला, उत्तर टोला, दक्षिण टोला के प्राय: सभी हिस्से पानी से भर गए हैं। हालांकि सोमवार को बारिश से कुछ राहत मिली। लेकिन हर तरफ जलजमाव के कारण लोगों को घर से निकलने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अब लोगों को बीमारियां फैलने की चिता सताने लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के कारण भोरे के ग्रामीणों को यह दिन देखना पड़ रहा है। नालियों की समय रहते सफाई नहीं कराई गई। सभी नालियां जाम होने से पानी नहीं निकल पा रहा है। उन्होंने कहा कि नालियां जाम होने के कारण कितने दिन तक जलजमाव झेलना पड़ेगा, यह कहना मुश्किल है।

चंदा इकट्ठा कर जेसीवी से नालियां साफ करा रहे ग्रामीण:

नालियां जाम होने के कारण भोरे बाजार से लेकर भोरे गांव के टापू बन जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन नालियों को साफ कराने के प्रति उदासीन बना हुआ है। जिसे देखते हुए जलनिकासी की व्यवस्था करने के लिए अब ग्रामीण खुद आगे आ गए हैं। सोमवार को ग्रामीणों तथा व्यवसासियों ने चंदा इकट्ठा कर जेसीबी से मजदूरों के माध्यम से नालों की सफाई तथा जगह-जगह सड़कों से पानी बहाव के रास्ते बनवा कर मोहल्लों और सड़कों से पानी निकाल में जुटे रहे। भोरे गांव निवासी दीपू मिश्रा, कृष्णकांत सिंह, अशोक दुबे, अशोक मिश्रा, सामंत सिंह, जवाहर प्रसाद, धर्मेंद्र प्रसाद, शिवजी मिश्रा, लक्ष्मण मिश्रा, श्रीराम साह, मिथिलेश सिंह, परेश सिंह, राजन कुमार, हीरामन कुमार आदि ने बताया कि पानी भले की कुछ दिन में निकल जाने से आवागमन की कठिनाइयां दूर हो जाएगी। लेकिन घरों के आसपास जलजमाव के कारण पानी प्रदूषण होने से बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहेगी। अगर जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो भोरे के लिए यह बरसात आफत की बरसात साबित होगी। जिसे देखते हुए अब प्रशासन की बाट जोहने की बजाय ग्रामीण व व्यवसायी खुद चंदा इकट्ठा कर पानी की निकास करने का प्रयास कर रहे हैं।